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Thursday, August 04, 2011

Ajeeb lagti hai sham kabhi kabhi

Ajeeb lagti hai sham kabhi kabhi

Zindagi lagti hai bejaan kabhi kabhi
Samjh Aaye tou humen bhi batana
Ke kyun karti hain yaden pareshan kabhi kabhi.

Nazar badal ke dekho, nazaare badal jaayenge

Nazar badal ke dekho, nazaare badal jaayenge,

Soch badal ke dekho, sitare badal jaayenge,
Kashtiyan badalne ki kya zaroorat,
Dishayein badal ke dekho, Kinare badal jaayenge.

Thursday, January 20, 2011

From My Old Diary--By Nida Fazali

वो शोख शोख नज़र सांवली सी एक लड़की
जो रोज़ मेरी गली से गुज़र के जाती है
सुना है
वो किसी लड़के से प्यार करती है
बहार हो के, तलाश-ए-बहार करती है
न कोई मेल न कोई लगाव है लेकिन न जाने क्यूँ
बस उसी वक़्त जब वो आती है
कुछ इंतिज़ार की आदत सी हो गई है
मुझे
एक अजनबी की ज़रूरत हो गई है मुझे
मेरे बरांडे के आगे यह फूस का छप्पर
गली के मोड पे खडा हुआ सा
एक पत्थर
वो एक झुकती हुई बदनुमा सी नीम की शाख
और उस पे जंगली कबूतर के घोंसले का निशाँ
यह सारी चीजें कि जैसे मुझी में शामिल हैं
मेरे दुखों में मेरी हर खुशी में शामिल हैं
मैं चाहता हूँ कि वो भी यूं ही गुज़रती रहे
अदा-ओ-नाज़ से लड़के को प्यार करती रहे



निदा फाज़ली

Friday, November 12, 2010

Sher -O-Shari....

ज़िन्दगी की राह में आगे चलते जाना हर पल,
मुड़ के ना देख बीते हुए पल
जो नहीं था तेरा तुझे नहीं मिला
जो मिल गया उसके साथ गुज़ार अपना हर पल

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हम फिर बेवफा से रिश्ता बना  बैठे ,
फिर उनकी सादगी से धोका खा बैठे ,
पत्थर से है तालुकात अपना,
फिर भी शीशे का घर बना बैठे !!
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By Nida Fazli............

अपना ग़म लेके कहीं और न जाया जाये
घर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाये

जिन चिराग़ों को हवाओं का कोई ख़ौफ़ नहीं
उन चिराग़ों को हवाओं से बचाया जाये

बाग में जाने के आदाब हुआ करते हैं
किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाये

ख़ुदकुशी करने की हिम्मत नहीं होती सब में
और कुछ दिन यूँ ही औरों को सताया जाये

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये